कैंडलस्टिक की संरचना और पैटर्न
कैंडलस्टिक एक प्रकार का चार्ट है जो शेयर बाजार, फॉरेक्स, कमोडिटी, या अन्य वित्तीय बाजारों में मूल्य की गतिविधियों को दर्शाने के लिए उपयोग किया जाता है। यह तकनीकी विश्लेषण (टेक्निकल एनालिसिस) का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है और निवेशकों या ट्रेडर को बाजार के रुझानों (ट्रेंड्स) और भावी मूल्य परिवर्तनों का अनुमान लगाने में मदद करता है। कैंडलस्टिक चार्ट की शुरुआत 17वीं शताब्दी में जापान में हुई थी, और इसे चावल व्यापारी मुनेहिसा होम्मा ने विकसित किया था।
कैंडलस्टिक की संरचना
एक कैंडलस्टिक चार मुख्य मूल्य बिंदुओं को दर्शाती है, जो किसी निश्चित समय अवधि ( जैसे 1 मिनट, 5 मिनट, 1 दिन, वीकली, मंथली आदि ) के लिए होते हैं :
ओपन प्राइस : वह मूल्य जिस पर उस समय अवधि में पहला सौदा हुआ, क्लोज प्राइस : वह मूल्य जिस पर उस समय अवधि में आखिरी सौदा हुआ, हाई प्राइस : उस समय अवधि में सबसे ऊँचा मूल्य। लो प्राइस : उस समय अवधि में सबसे निचला मूल्य।
कैंडलस्टिक के हिस्से
बॉडी : यह कैंडल का मोटा हिस्सा होता है, जो ओपन और क्लोज प्राइस के बीच का अंतर दिखाता है। अगर क्लोज प्राइस ओपन से अधिक है, तो बॉडी आमतौर पर हरी या सफेद होती है (बुलिश कैंडल - कीमत बढ़ी)। अगर क्लोज प्राइस ओपन से कम है, तो बॉडी लाल या काली होती है (बेयरिश कैंडल - कीमत गिरी)।
विक्स/शैडो : बॉडी के ऊपर और नीचे की पतली रेखाएँ, जो हाई और लो प्राइस को दर्शाती हैं। इन्हें "ऊपरी छाया" (अपर शैडो) और "निचली छाया" (लोअर शैडो) कहते हैं।
कैंडलस्टिक कैसे काम करता है?
कैंडलस्टिक चार्ट बाजार के मूल्य को समय के साथ दिखाता है, और यह निवेशकों या ट्रेडर को बाजार की मनोदशा और संभावित रुझानों को समझने में मदद करता है। यह निम्नलिखित तरीकों से काम करता है:
पैटर्न की पहचान : कैंडलस्टिक पैटर्न ( जैसे डोजी, हैमर, एंगल्फिंग, मॉर्निंग स्टार आदि ) बाजार के उलटने (रिवर्सल) या निरंतरता (कंटीन्यूएशन) के संकेत देते हैं।
उदाहरण : हैमर (नीचे लंबी छाया, छोटी बॉडी) नीचे की ओर रुझान के बाद उलटने का संकेत देता है, जिसका मतलब हो सकता है कि कीमत अब बढ़ेगी।
डोजी (छोटी बॉडी, लंबी छाया) अनिश्चितता दिखाता है, जो रुझान बदलने का संकेत हो सकता है।
समय अवधि के आधार पर विश्लेषण : व्यापारी अपनी रणनीति के अनुसार अलग-अलग समय अवधि (1 मिनट, 5 मिनट, 1 दिन, वीकली, मंथली आदि ) की कैंडल्स देखते हैं। छोटी अवधि (जैसे 1 मिनट) डे ट्रेडिंग के लिए। लंबी अवधि (जैसे 1 दिन) लंबे समय के निवेश के लिए।
बाजार की भावना समझना: कैंडल की बॉडी और छाया से पता चलता है कि खरीदार (बायर्स) या विक्रेता (सेलर्स) का दबाव अधिक है। लंबी हरी बॉडी मतलब खरीदारों का दबदबा, कीमत बढ़ने की संभावना। लंबी लाल बॉडी मतलब विक्रेताओं का दबदबा, कीमत गिरने की संभावना।
समर्थन और प्रतिरोध स्तर : कैंडल्स समर्थन (सपोर्ट) और प्रतिरोध (रेजिस्टेंस) स्तरों की पहचान में मदद करती हैं। अगर कीमत बार-बार किसी स्तर से उछलती है, तो वह सपोर्ट/रेजिस्टेंस हो सकता है।
उदाहरणमान लीजिए किसी स्टॉक की 1 दिन की कैंडल है: ओपन: 100 रुपये, क्लोज: 110 रुपये, हाई: 112 रुपये, लो: 98 रुपये यह एक हरी कैंडल होगी क्योंकि क्लोज, ओपन से ऊपर है , जिसकी बॉडी 100 से 110 तक होगी, ऊपरी छाया 110 से 112 तक, और निचली छाया 100 से 98 तक। यह दिखाता है कि दिन के अंत में खरीदारों ने दबाव बनाया और कीमत बढ़ी।
कैंडल, केवल मूल्य की जानकारी देता है, बाजार के अन्य कारक (जैसे समाचार, आर्थिक घटनाएँ) को शामिल नहीं करता। गलत व्याख्या की भी संभावना बनीं रहती है, खासकर नए निवेशकों या ट्रेडर के लिए। छोटी समय अवधि में भ्रामक संकेत दे सकता है।
संक्षेप में, कैंडलस्टिक चार्ट एक शक्तिशाली टूल है जो निवेशकों या ट्रेडर को बाजार के रुझानों और मूल्य व्यवहार को समझने में मदद करता है, लेकिन इसे अन्य इंडीकेटर्स और रणनीतियों के साथ मिलाकर उपयोग करना सबसे प्रभावी होता है।
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