तापमान में वृद्धि के कई कारणों में एल नीनो, पर्माफ्रॉस्ट पिघलना व जंगल की आग का असर
धरती का तापमान बढ़ने के पीछे कई कारण हैं। वैज्ञानिकों ने कुछ हालिया कारणों पर विशेष ध्यान दिया है जो इस समस्या को बढ़ा रहे हैं. जैसे की वैश्विक स्तर पर जीवाश्म ईंधन कोयला, तेल, और गैस का उपयोग रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचना, अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी के अनुसार, वैश्विक CO₂ उत्सर्जन 2024 में 37.4 बिलियन टन तक पहुंच गया, जो पिछले वर्षों की तुलना में अधिक है। यह ऊर्जा संकट और औद्योगिक गतिविधियों में वृद्धि के कारण हुआ।
एल नीनो का प्रभाव 2023-24 में शुरू हुआ जो अभी तक बना हुआ है, जिसने वैश्विक तापमान को बढ़ाया। यह प्राकृतिक घटना समुद्र की सतह के तापमान को बढ़ाती है, जिससे गर्मी वायुमंडल में स्थानांतरित होती है। आर्कटिक क्षेत्र में पर्माफ्रॉस्ट (जमी हुई मिट्टी) के पिघलने की गति बढ़ी है, जिससे बड़ी मात्रा में मीथेन CH₄ गैस निकल रही है। मीथेन CO₂ से 25-30 गुना अधिक गर्मी सोखने वाली गैस है, और 2024 में इसके उत्सर्जन में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई। अमेजन, ऑस्ट्रेलिया, और साइबेरिया में जंगल की आग ने न केवल CO₂ उत्सर्जन बढ़ाया, बल्कि कार्बन सोखने वाले जंगलों को भी नष्ट किया। यह एक दोहरी मार है जो तापमान में वृद्धि कर रही है।
बिहार में मौसम के पैटर्न में पिछले कुछ वर्षों में काफी बदलाव देखा गया है, जो जलवायु परिवर्तन और स्थानीय पर्यावरणीय कारकों का परिणाम है। बिहार में औसत तापमान में पिछले 25 वर्षों में प्रति वर्ष लगभग 0.04 से 0.1 डिग्री सेल्सियस की वृद्धि हुई है। मार्च 2025 में, सामान्य से अधिक गर्मी देखी जा रही है, जहां अधिकतम तापमान 34-36 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच रहा है, जो इस मौसम के लिए असामान्य है। बिहार में मानसून पहले की तुलना में देरी से शुरू हो रहा है और जल्दी खत्म हो रहा है। 2024 में मानसून की बारिश सामान्य से 15-20% कम रही, जिसने सूखे जैसी स्थिति पैदा की। इसके विपरीत, कुछ क्षेत्रों में अचानक भारी बारिश से बाढ़ भी आई। सर्दियों की अवधि कम हो रही है। जनवरी-फरवरी 2025 में न्यूनतम तापमान सामान्य से 2-3 डिग्री अधिक रहा, और ठंड का प्रभाव पहले की तुलना में कम समय तक रहा। पछुआ हवाओं का प्रभाव भी कमजोर पड़ा है। मार्च 2025 में बिहार के कई जिलों, जैसे पटना, गया, और भागलपुर, में गर्मी और उमस बढ़ी है।
धरती के तापमान में वृद्धि के नवीनतम कारणों, जैसे एल नीनो, पर्माफ्रॉस्ट पिघलना, और जंगल की आग, का असर बिहार जैसे क्षेत्रों में भी स्पष्ट है। बिहार में मौसम अब पहले जैसा नियमित नहीं रहा, गर्मी बढ़ रही है, सर्दी कम हो रही है, और वर्षा का पैटर्न अनिश्चित हो गया है। यह बदलाव न केवल पर्यावरण, बल्कि कृषि और जनजीवन पर भी गहरा प्रभाव डाल रहा है।
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