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UGC का विरोध, सामान्य वर्ग (जनरल कैटेगरी) के बच्चों के भविष्य के लिए !

झूठा/फालतू आरोप लगाने पर कोई विशेष सजा नहीं ! ड्राफ्ट में false/frivolous complaint पर penalty का क्लॉज था, लेकिन फाइनल नियम (जनवरी 2026) में हटा दिया गया—पीड़ित बिना डर के शिकायत करें, इसलिए safeguard नहीं रखा। झूठी शिकायत पर IPC 182/211 (झूठी रिपोर्ट/मानहानि) या कॉलेज के आंतरिक नियम लागू हो सकते हैं, लेकिन UGC में कोई penalty नहीं। अगर SC/ST/OBC छात्र जनरल छात्र को जातिगत भेदभाव करता है UGC नियम में कोई सीधा प्रावधान नहीं। ये एक तरफा  है, जनरल के लिए जाति पर कोई प्रोटेक्शन नहीं।   सामान्य वर्ग (जनरल कैटेगरी) के खिलाफ जातिगत भेदभाव (गाली, बहिष्कार, हारासमेंट) को UGC नियम में कवर नहीं किया गया।  जातिगत भेदभाव की परिभाषा (Regulation 3(c)): सिर्फ SC, ST, OBC के खिलाफ जाति/जनजाति आधारित भेदभाव को कवर करता है।  बच्चों के भविष्य के लिए  अगर जनरल कैटेगरी में बच्चे हैं, तो विरोध/जागरूकता/कानूनी रास्ता अपनाना उचित है—झूठे आरोप  से पढ़ाई/करियर प्रभावित हो सकता है। शांतिपूर्ण तरीके से आवाज उठाएं, ताकि नियम सभी के लिए बराबर और सुरक्षित बनें। ये कदम उठाकर सरकार वि...

तन को शुद्ध तो मन को शक्ति प्रदान करता है उपवास


उपवास हमारे शरीर को स्वस्थ और मन को प्रसन्न रखता है

उपवास का अर्थ है एक निश्चित समय तक भोजन या कुछ खास प्रकार के भोजन से परहेज करना। यह प्राचीन काल से विभिन्न संस्कृतियों और धर्मों में प्रचलित रहा है। उपवास केवल आध्यात्मिक या धार्मिक दृष्टिकोण से ही नहीं, बल्कि वैज्ञानिक रूप से भी स्वास्थ्य के लिए लाभकारी माना जाता है। 

जब हम उपवास करते हैं, तो शरीर में कई जैविक प्रक्रियाएं शुरू होती हैं। सामान्य रूप से शरीर ग्लूकोज को ऊर्जा के लिए उपयोग करता है। उपवास के दौरान जब ग्लूकोज की आपूर्ति कम हो जाती है तो शरीर वसा को तोड़कर ऊर्जा प्राप्त करता है। इसे केटोसिस कहते हैं। इस दौरान इंसुलिन का स्तर कम होता है, और नॉरएपिनेफ्रिन जैसे हॉर्मोन बढ़ते हैं, जो वसा कोशिकाओं को तोड़ने में मदद करते हैं।

उपवास के दौरान ऑटोफैगी नामक प्रक्रिया सक्रिय होती है, जिसमें कोशिकाएं अपने पुराने और क्षतिग्रस्त हिस्सों को साफ करती हैं। उपवास कैलोरी की मात्रा को सीमित करता है, जिससे वजन कम करने में मदद मिलती है। यह मेटाबॉलिज्म को बेहतर कर वसा जलाने की प्रक्रिया को बढ़ावा देता है।

उपवास से कोलेस्ट्रॉल, ट्राइग्लिसराइड्स और ब्लड प्रेशर का स्तर कम हो सकता है, जो हृदय रोगों से बचाव में सहायक है। यह  ब्रेन-डिराइव्ड न्यूरोट्रॉफिक फैक्टर के उत्पादन को बढ़ाता है, जो मस्तिष्क की कोशिकाओं के विकास और संरक्षण में मदद करता है। इससे याददाश्त और सीखने की क्षमता में सुधार हो सकता है।

उपवास के दौरान कोशिकाओं की सफाई से शरीर से विषाक्त पदार्थ बाहर निकलते हैं, जिससे स्वास्थ्य में सुधार होता है। कुछ अध्ययनों के अनुसार, उपवास उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को धीमा कर सकता है और जीवनकाल को बढ़ाने में योगदान दे सकता है।

उपवास हर किसी के लिए उपयुक्त नहीं होता। गर्भवती महिलाओं, बच्चों, बुजुर्गों या किसी गंभीर बीमारी से पीड़ित लोगों को डॉक्टर की सलाह से ही उपवास करना चाहिए।लंबे समय तक उपवास करने से थकान, चक्कर या पोषक तत्वों की कमी हो सकती है, इसलिए इसे संतुलित तरीके से करना जरूरी है। 

कुल मिलाकर, उपवास न केवल शरीर को शुद्ध करता है, बल्कि आत्म-अनुशासन और मानसिक शक्ति भी प्रदान करता है। 

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