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UGC का विरोध, सामान्य वर्ग (जनरल कैटेगरी) के बच्चों के भविष्य के लिए !

झूठा/फालतू आरोप लगाने पर कोई विशेष सजा नहीं ! ड्राफ्ट में false/frivolous complaint पर penalty का क्लॉज था, लेकिन फाइनल नियम (जनवरी 2026) में हटा दिया गया—पीड़ित बिना डर के शिकायत करें, इसलिए safeguard नहीं रखा। झूठी शिकायत पर IPC 182/211 (झूठी रिपोर्ट/मानहानि) या कॉलेज के आंतरिक नियम लागू हो सकते हैं, लेकिन UGC में कोई penalty नहीं। अगर SC/ST/OBC छात्र जनरल छात्र को जातिगत भेदभाव करता है UGC नियम में कोई सीधा प्रावधान नहीं। ये एक तरफा  है, जनरल के लिए जाति पर कोई प्रोटेक्शन नहीं।   सामान्य वर्ग (जनरल कैटेगरी) के खिलाफ जातिगत भेदभाव (गाली, बहिष्कार, हारासमेंट) को UGC नियम में कवर नहीं किया गया।  जातिगत भेदभाव की परिभाषा (Regulation 3(c)): सिर्फ SC, ST, OBC के खिलाफ जाति/जनजाति आधारित भेदभाव को कवर करता है।  बच्चों के भविष्य के लिए  अगर जनरल कैटेगरी में बच्चे हैं, तो विरोध/जागरूकता/कानूनी रास्ता अपनाना उचित है—झूठे आरोप  से पढ़ाई/करियर प्रभावित हो सकता है। शांतिपूर्ण तरीके से आवाज उठाएं, ताकि नियम सभी के लिए बराबर और सुरक्षित बनें। ये कदम उठाकर सरकार वि...

खबरों से उपजा भय : हेडलाइन स्ट्रेस डिसऑर्डर

मीडिया-प्रेरित चिंता को समझें और इससे निपटने के प्रभावी उपाय अपनाएं

हेडलाइन स्ट्रेस डिसऑर्डर यह एक ऐसी स्थिति है जिसमें लोग समाचारों की सुर्खियों (हेडलाइन्स) को बार-बार देखने या पढ़ने के कारण तनाव, चिंता या डर का अनुभव करते हैं। यह विशेष रूप से तब होता है जब खबरें युद्ध, हिंसा, या आपदाओं जैसे परेशान करने वाले विषयों पर केंद्रित हों। इसे "मीडिया-प्रेरित चिंता" का एक रूप भी माना जा सकता है।
आज के डिजिटल युग में, टीवी और सोशल मीडिया पर युद्ध की खबरें निरंतर प्रसारित होती रहती हैं। इन खबरों को बार-बार देखने से लोगों, विशेषकर बच्चों और संवेदनशील व्यक्तियों में भय और चिंता पैदा हो सकती है। यह तब होता है, जब व्यक्ति स्वयं खतरे में न होने पर भी हिंसक समाचारों से प्रभावित होकर तनाव और डर महसूस करता है। इस भय के लक्षणों में नींद न आना, बेचैनी, नकारात्मक विचार, और सामाजिक अलगाव शामिल हो सकते हैं।
इसे ठीक करने के लिए निम्नलिखित उपाय अपनाए जा सकते हैं :
  • मीडिया एक्सपोजर सीमित करें : दिन में एक निश्चित समय समाचार देखने के लिए निर्धारित करें और अनावश्यक रूप से हिंसक सामग्री से बचें।
  • सकारात्मक गतिविधियाँ : ध्यान, योग, खेल, या रचनात्मक कार्य जैसे लेखन और चित्रकला मन को शांत करते हैं।
  • सामाजिक समर्थन : परिवार और दोस्तों से बातचीत चिंता को कम करती है। अपनी भावनाओं को साझा करें।
  • विशेषज्ञ सहायता : यदि भय गंभीर हो, तो मनोवैज्ञानिक या काउंसलर से परामर्श लें।
युद्ध की खबरें वास्तविकता का हिस्सा हो सकती हैं, लेकिन इनका हमारे मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव न पड़े, इसके लिए संतुलित दृष्टिकोण अपनाना जरूरी है। सकारात्मकता और आत्म-देखभाल के साथ हम इस भय को नियंत्रित कर सकते हैं।

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