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UGC का विरोध, सामान्य वर्ग (जनरल कैटेगरी) के बच्चों के भविष्य के लिए !

झूठा/फालतू आरोप लगाने पर कोई विशेष सजा नहीं ! ड्राफ्ट में false/frivolous complaint पर penalty का क्लॉज था, लेकिन फाइनल नियम (जनवरी 2026) में हटा दिया गया—पीड़ित बिना डर के शिकायत करें, इसलिए safeguard नहीं रखा। झूठी शिकायत पर IPC 182/211 (झूठी रिपोर्ट/मानहानि) या कॉलेज के आंतरिक नियम लागू हो सकते हैं, लेकिन UGC में कोई penalty नहीं। अगर SC/ST/OBC छात्र जनरल छात्र को जातिगत भेदभाव करता है UGC नियम में कोई सीधा प्रावधान नहीं। ये एक तरफा  है, जनरल के लिए जाति पर कोई प्रोटेक्शन नहीं।   सामान्य वर्ग (जनरल कैटेगरी) के खिलाफ जातिगत भेदभाव (गाली, बहिष्कार, हारासमेंट) को UGC नियम में कवर नहीं किया गया।  जातिगत भेदभाव की परिभाषा (Regulation 3(c)): सिर्फ SC, ST, OBC के खिलाफ जाति/जनजाति आधारित भेदभाव को कवर करता है।  बच्चों के भविष्य के लिए  अगर जनरल कैटेगरी में बच्चे हैं, तो विरोध/जागरूकता/कानूनी रास्ता अपनाना उचित है—झूठे आरोप  से पढ़ाई/करियर प्रभावित हो सकता है। शांतिपूर्ण तरीके से आवाज उठाएं, ताकि नियम सभी के लिए बराबर और सुरक्षित बनें। ये कदम उठाकर सरकार वि...

बच्चों में बढ़ती आक्रामकता, बड़े कैसे संभालें!


सही मार्गदर्शन और प्रेम से निकालें हल

आजकल बच्चों में आक्रामकता की समस्या बढ़ती जा रही है, जो माता-पिता और शिक्षकों के लिए चिंता का विषय है। यह आक्रामकता गुस्सा, चिड़चिड़ापन, या हिंसक व्यवहार के रूप में प्रकट हो सकती है। इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं, जैसे पारिवारिक तनाव, स्कूल का दबाव, डिजिटल मीडिया का अत्यधिक उपयोग, या भावनात्मक असंतुलन।
आक्रामकता के कारण
  • पारिवारिक माहौल : घर में झगड़े या उपेक्षा बच्चों को आक्रामक बना सकती है।
  • मीडिया का प्रभाव : हिंसक वीडियो गेम्स या फिल्में बच्चों के व्यवहार को प्रभावित करती हैं।
  • संचार की कमी : बच्चे अपनी भावनाओं को व्यक्त न कर पाने पर गुस्से का सहारा लेते हैं।
  • मानसिक दबाव : पढ़ाई या सामाजिक दबाव बच्चों में तनाव बढ़ाता है।
बड़ों को क्या करना चाहिए?
  • सहानुभूति और संवाद : बच्चों से उनकी भावनाओं के बारे में खुलकर बात करें। उनकी बात सुनें और बिना आलोचना किए समझें।
  • सकारात्मक माहौल : घर में शांति और प्रेम का वातावरण बनाएं। माता-पिता का व्यवहार बच्चों के लिए रोल मॉडल होता है।
  • समय बिताएं : बच्चों के साथ गुणवत्तापूर्ण समय बिताएं, जैसे खेलना, कहानियां सुनाना, या उनकी रुचियों में शामिल होना।
  • सीमाएं निर्धारित करें : नियम बनाएं, लेकिन सख्ती के बजाय प्यार से उन्हें समझाएं।
  • भावनात्मक शिक्षा: बच्चों को गुस्से को नियंत्रित करने के तरीके सिखाएं, जैसे गहरी सांस लेना या अपनी बात शांति से कहना।
  • पेशेवर मदद : अगर आक्रामकता नियंत्रण से बाहर हो, तो बाल मनोवैज्ञानिक की सलाह लें।
बच्चों में आक्रामकता को समझदारी और धैर्य से संभाला जा सकता है। माता-पिता और शिक्षकों को बच्चों के साथ मजबूत रिश्ता बनाना चाहिए, ताकि वे अपनी भावनाओं को सुरक्षित तरीके से व्यक्त कर सकें। सही मार्गदर्शन और प्रेम से बच्चे न केवल अपनी आक्रामकता पर काबू पा सकते हैं, बल्कि भावनात्मक रूप से भी मजबूत बन सकते हैं।

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