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UGC का विरोध, सामान्य वर्ग (जनरल कैटेगरी) के बच्चों के भविष्य के लिए !

झूठा/फालतू आरोप लगाने पर कोई विशेष सजा नहीं ! ड्राफ्ट में false/frivolous complaint पर penalty का क्लॉज था, लेकिन फाइनल नियम (जनवरी 2026) में हटा दिया गया—पीड़ित बिना डर के शिकायत करें, इसलिए safeguard नहीं रखा। झूठी शिकायत पर IPC 182/211 (झूठी रिपोर्ट/मानहानि) या कॉलेज के आंतरिक नियम लागू हो सकते हैं, लेकिन UGC में कोई penalty नहीं। अगर SC/ST/OBC छात्र जनरल छात्र को जातिगत भेदभाव करता है UGC नियम में कोई सीधा प्रावधान नहीं। ये एक तरफा  है, जनरल के लिए जाति पर कोई प्रोटेक्शन नहीं।   सामान्य वर्ग (जनरल कैटेगरी) के खिलाफ जातिगत भेदभाव (गाली, बहिष्कार, हारासमेंट) को UGC नियम में कवर नहीं किया गया।  जातिगत भेदभाव की परिभाषा (Regulation 3(c)): सिर्फ SC, ST, OBC के खिलाफ जाति/जनजाति आधारित भेदभाव को कवर करता है।  बच्चों के भविष्य के लिए  अगर जनरल कैटेगरी में बच्चे हैं, तो विरोध/जागरूकता/कानूनी रास्ता अपनाना उचित है—झूठे आरोप  से पढ़ाई/करियर प्रभावित हो सकता है। शांतिपूर्ण तरीके से आवाज उठाएं, ताकि नियम सभी के लिए बराबर और सुरक्षित बनें। ये कदम उठाकर सरकार वि...

महावीर जयंती : बिहार की आध्यात्मिक धरोहर का उत्सव

अहिंसा के पुजारी और जैन धर्म के 24वें तीर्थकर का जन्मदिवस

महावीर जयंती जैन धर्म का प्रमुख पर्व है, जो 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। यह त्योहार चैत्र शुक्ल त्रयोदशी को पड़ता है। भगवान महावीर का जन्म बिहार के वैशाली जिले में कुंडग्राम में 599 ईसा पूर्व हुआ था, जिसके कारण बिहार के साथ उनका गहरा संबंध है। वे राजा सिद्धार्थ और रानी त्रिशला के पुत्र थे और 30 वर्ष की आयु में गृहत्याग कर तपस्या के पथ पर चल पड़े।जिन्होंने अहिंसा, सत्य, और आत्म-संयम के सिद्धांतों को जन-जन तक पहुँचाया।  उनकी शिक्षाएँ अहिंसा, सत्य, अपरिग्रह, अचौर्य, और ब्रह्मचर्य जैन धर्म का आधार बनीं।

बिहार में महावीर जयंती का विशेष महत्व है, क्योंकि यह उनकी जन्मभूमि और कर्मभूमि दोनों रहा। वैशाली के अलावा, पावापुरी भी पवित्र स्थल है, जहाँ महावीर ने 527 ईसा पूर्व में निर्वाण प्राप्त किया था। इस दिन बिहार के जैन मंदिरों, खासकर पावापुरी के जल मंदिर में भक्तों की भीड़ उमड़ती है। शोभायात्राएँ, पूजा, दान, और प्रवचन यहाँ के मुख्य आयोजन होते हैं।

बिहार के लिए महावीर जयंती केवल धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि सांस्कृतिक गौरव का प्रतीक भी है। यहाँ के लोग उनकी अहिंसा और शांति की शिक्षाओं को जीवन में अपनाने की प्रेरणा लेते हैं। यह पर्व बिहार की ऐतिहासिक और आध्यात्मिक धरोहर को उजागर करता है, जो इसे विश्व पटल पर विशिष्ट बनाता है।

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