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UGC का विरोध, सामान्य वर्ग (जनरल कैटेगरी) के बच्चों के भविष्य के लिए !

झूठा/फालतू आरोप लगाने पर कोई विशेष सजा नहीं ! ड्राफ्ट में false/frivolous complaint पर penalty का क्लॉज था, लेकिन फाइनल नियम (जनवरी 2026) में हटा दिया गया—पीड़ित बिना डर के शिकायत करें, इसलिए safeguard नहीं रखा। झूठी शिकायत पर IPC 182/211 (झूठी रिपोर्ट/मानहानि) या कॉलेज के आंतरिक नियम लागू हो सकते हैं, लेकिन UGC में कोई penalty नहीं। अगर SC/ST/OBC छात्र जनरल छात्र को जातिगत भेदभाव करता है UGC नियम में कोई सीधा प्रावधान नहीं। ये एक तरफा  है, जनरल के लिए जाति पर कोई प्रोटेक्शन नहीं।   सामान्य वर्ग (जनरल कैटेगरी) के खिलाफ जातिगत भेदभाव (गाली, बहिष्कार, हारासमेंट) को UGC नियम में कवर नहीं किया गया।  जातिगत भेदभाव की परिभाषा (Regulation 3(c)): सिर्फ SC, ST, OBC के खिलाफ जाति/जनजाति आधारित भेदभाव को कवर करता है।  बच्चों के भविष्य के लिए  अगर जनरल कैटेगरी में बच्चे हैं, तो विरोध/जागरूकता/कानूनी रास्ता अपनाना उचित है—झूठे आरोप  से पढ़ाई/करियर प्रभावित हो सकता है। शांतिपूर्ण तरीके से आवाज उठाएं, ताकि नियम सभी के लिए बराबर और सुरक्षित बनें। ये कदम उठाकर सरकार वि...

विश्व प्रसिद्ध संगीतकार और सितार वादक का जन्मदिन

पंडित रविशंकर ने भारतीय संगीत को भारत में ही नहीं विदेश में भी ख्याति दिलाई

पंडित रविशंकर, जिनका पूरा नाम रवि शंकर था, उनका जन्म 7 अप्रैल, 1920 को बनारस उत्तर प्रदेश में एक बंगाली ब्राह्मण परिवार में हुआ था। उनके पिता, श्याम शंकर चौधरी, एक विद्वान और वकील थे। रविशंकर का जन्म नाम रोबिंद्रो शाइको था, जिसे बाद में बदलकर रवि शंकर कर दिया गया। उनका जन्म एक ऐसे समय में हुआ जब भारत औपनिवेशिक शासन के अधीन था, और उनकी प्रारंभिक जिंदगी में सांस्कृतिक और संगीतमय प्रभावों का गहरा असर पड़ा। बचपन से ही उन्हें कला और संगीत के प्रति रुझान था, जो आगे चलकर उनके जीवन का आधार बना। पंडित रविशंकर ने भारतीय शास्त्रीय संगीत को वैश्विक मंच पर पहचान दिलाई और पश्चिमी संगीतकारों जैसे जॉर्ज हैरिसन के साथ सहयोग कर संगीत की दुनिया में एक नया आयाम जोड़ा। वाराणसी में जन्मे पंडित रविशंकर एक संगीत प्रतिभा थे, जिन्होंने सितार को विश्व स्तर पर लोकप्रिय बनाया।

पंडित रविशंकर को उनके योगदान के लिए कई सम्मान मिले। भारत सरकार ने उन्हें भारत रत्न (1999), पद्म भूषण (1967), और पद्म विभूषण (1981) से नवाजा। इसके अलावा, उन्हें ग्रैमी पुरस्कार सहित कई अंतरराष्ट्रीय सम्मान भी प्राप्त हुए। वे संगीत नाटक अकादमी के फेलो भी रहे।

रविशंकर का विवाह अन्नपूर्णा देवी से हुआ था, जो उस्ताद अलाउद्दीन खान की बेटी और एक कुशल संगीतकार थीं। उनके बेटे शुभेंद्र शंकर भी सितार वादक थे, हालांकि उनकी मृत्यु कम उम्र में हो गई। बाद में रविशंकर की बेटी अनुष्का शंकर ने भी सितार वादन में अपनी पहचान बनाई और अपने पिता की विरासत को आगे बढ़ाया। उनकी दूसरी बेटी, नोरा जोन्स, एक प्रसिद्ध पॉप और जैज़ गायिका हैं।

पंडित रविशंकर का निधन 11 दिसंबर 2012 को कैलिफोर्निया, अमेरिका में हुआ, लेकिन उनकी संगीत विरासत आज भी जीवित है। वे न केवल एक संगीतकार थे, बल्कि भारतीय संस्कृति के एक प्रतीक थे, जिन्होंने पूर्व और पश्चिम के बीच संगीत के माध्यम से एक सेतु बनाया। उनकी रचनाएँ और शिक्षाएँ आज भी संगीत प्रेमियों और छात्रों को प्रेरित करती हैं।

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