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UGC का विरोध, सामान्य वर्ग (जनरल कैटेगरी) के बच्चों के भविष्य के लिए !

झूठा/फालतू आरोप लगाने पर कोई विशेष सजा नहीं ! ड्राफ्ट में false/frivolous complaint पर penalty का क्लॉज था, लेकिन फाइनल नियम (जनवरी 2026) में हटा दिया गया—पीड़ित बिना डर के शिकायत करें, इसलिए safeguard नहीं रखा। झूठी शिकायत पर IPC 182/211 (झूठी रिपोर्ट/मानहानि) या कॉलेज के आंतरिक नियम लागू हो सकते हैं, लेकिन UGC में कोई penalty नहीं। अगर SC/ST/OBC छात्र जनरल छात्र को जातिगत भेदभाव करता है UGC नियम में कोई सीधा प्रावधान नहीं। ये एक तरफा  है, जनरल के लिए जाति पर कोई प्रोटेक्शन नहीं।   सामान्य वर्ग (जनरल कैटेगरी) के खिलाफ जातिगत भेदभाव (गाली, बहिष्कार, हारासमेंट) को UGC नियम में कवर नहीं किया गया।  जातिगत भेदभाव की परिभाषा (Regulation 3(c)): सिर्फ SC, ST, OBC के खिलाफ जाति/जनजाति आधारित भेदभाव को कवर करता है।  बच्चों के भविष्य के लिए  अगर जनरल कैटेगरी में बच्चे हैं, तो विरोध/जागरूकता/कानूनी रास्ता अपनाना उचित है—झूठे आरोप  से पढ़ाई/करियर प्रभावित हो सकता है। शांतिपूर्ण तरीके से आवाज उठाएं, ताकि नियम सभी के लिए बराबर और सुरक्षित बनें। ये कदम उठाकर सरकार वि...

विजयोत्सव : वीरता व बलिदान को याद करने का दिन

बिहार के शेर वीर कुंवर सिंह का विजयोत्सव

बिहार के महान स्वतंत्रता सेनानी वीर कुंवर सिंह की वीरता और 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में उनके योगदान को स्मरण करने के लिए मनाया जाने वाला एक महत्वपूर्ण उत्सव है। यह आयोजन 23 अप्रैल को उनके निधन दिवस के उपलक्ष्य में उत्साह के साथ आयोजित किया जाता है, यह उत्सव कुंवर सिंह की ब्रिटिश शासन के खिलाफ जीत, उनके साहस और बलिदान को श्रद्धांजलि अर्पित करता है।
कुंवर सिंह (1777-1858) जगदीशपुर के राजपूत जमींदार थे, जिन्होंने 80 वर्ष की आयु में 1857 के स्वतंत्रता संग्राम में बिहार में विद्रोह का नेतृत्व किया। उन्होंने आरा, जगदीशपुर और गंगा के तटवर्ती क्षेत्रों में ब्रिटिश सेना को कई बार परास्त किया। उनकी छापेमार युद्ध रणनीति और स्थानीय समर्थन ने ब्रिटिश प्रशासन को हिलाकर रख दिया। 23 अप्रैल, 1858 को, जगदीशपुर की रक्षा के दौरान घायल होने के बाद उनका निधन हुआ, लेकिन उनकी विजयों की गाथा आज भी जीवित है।
यह उत्सव कुंवर सिंह की सैन्य उपलब्धियों, ब्रिटिश सेना पर उनकी जीत को स्मरण करता है। यह बिहार और भारत के लोगों में स्वतंत्रता संग्राम की भावना और देशभक्ति को प्रेरित करता है। कुंवर सिंह ने अपनी सेना के साथ आरा पर कब्जा कर ब्रिटिश प्रशासन को चुनौती दी।उन्होंने कई बार ब्रिटिश सेना को जगदीशपुर में परास्त किया। उनकी रणनीति ने ब्रिटिश सेना को गंगा के तटवर्ती क्षेत्रों में भारी नुकसान पहुंचाय
कुंवर सिंह विजयोत्सव न केवल ऐतिहासिक स्मृति है, बल्कि यह आज भी स्वतंत्रता, साहस और एकता की भावना को जीवित रखता है। बिहार सरकार और स्थानीय संगठन इस उत्सव को बढ़ावा देते हैं ताकि नई पीढ़ी कुंवर सिंह के बलिदान और नेतृत्व से प्रेरणा ले सके। उनकी गाथाएं बिहार के लोकगीतों और साहित्य में जीवित हैं, जो उन्हें "बिहार का शेर" के रूप में अमर बनाती हैं।
यह उत्सव बिहार के लोगों के लिए गर्व का प्रतीक है और राष्ट्रीय एकता को मजबूत करता है। 23 अप्रैल को मनाए जाने वाले इस उत्सव के माध्यम से, कुंवर सिंह की गाथा नई पीढ़ियों तक पहुंचती है, जो हमें सिखाती है कि साहस और देशभक्ति की कोई उम्र नहीं होती।

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