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UGC का विरोध, सामान्य वर्ग (जनरल कैटेगरी) के बच्चों के भविष्य के लिए !

झूठा/फालतू आरोप लगाने पर कोई विशेष सजा नहीं ! ड्राफ्ट में false/frivolous complaint पर penalty का क्लॉज था, लेकिन फाइनल नियम (जनवरी 2026) में हटा दिया गया—पीड़ित बिना डर के शिकायत करें, इसलिए safeguard नहीं रखा। झूठी शिकायत पर IPC 182/211 (झूठी रिपोर्ट/मानहानि) या कॉलेज के आंतरिक नियम लागू हो सकते हैं, लेकिन UGC में कोई penalty नहीं। अगर SC/ST/OBC छात्र जनरल छात्र को जातिगत भेदभाव करता है UGC नियम में कोई सीधा प्रावधान नहीं। ये एक तरफा  है, जनरल के लिए जाति पर कोई प्रोटेक्शन नहीं।   सामान्य वर्ग (जनरल कैटेगरी) के खिलाफ जातिगत भेदभाव (गाली, बहिष्कार, हारासमेंट) को UGC नियम में कवर नहीं किया गया।  जातिगत भेदभाव की परिभाषा (Regulation 3(c)): सिर्फ SC, ST, OBC के खिलाफ जाति/जनजाति आधारित भेदभाव को कवर करता है।  बच्चों के भविष्य के लिए  अगर जनरल कैटेगरी में बच्चे हैं, तो विरोध/जागरूकता/कानूनी रास्ता अपनाना उचित है—झूठे आरोप  से पढ़ाई/करियर प्रभावित हो सकता है। शांतिपूर्ण तरीके से आवाज उठाएं, ताकि नियम सभी के लिए बराबर और सुरक्षित बनें। ये कदम उठाकर सरकार वि...

आरबीआई द्वारा रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट्स की कमी, जीडीपी ग्रोथ में बदलाव

आरबीआई ने रेट कटौती साथ अपनी नीति न्यूट्रल से बदलकर अकॉमोडेटिव कर दिया

आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने आज सुबह 10 बजे प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि MPC ने रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट्स (0.25%) की कटौती की है। अब रेपो रेट 6.25% से घटकर 6.00% हो गया है। MPC ने अपनी नीति स्टांस को "न्यूट्रल" से बदलकर "अकॉमोडेटिव" कर दिया है, जिसका मतलब है कि बैंक अब और लचीले ढंग से आर्थिक विकास को प्रोत्साहित करने के लिए कदम उठा सकता है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नई टैरिफ नीतियों से वैश्विक व्यापार में अनिश्चितता बढ़ी है, जो भारत के निर्यात और अर्थव्यवस्था पर असर डाल सकती है। RBI का यह कदम भारत को इन चुनौतियों से निपटने और घरेलू मांग को मजबूत करने की कोशिश है।

यह रेपो रेट कट एक सकारात्मक कदम है, जो मिडिल क्लास और व्यवसायों को राहत दे सकता है। हालांकि, इसके लंबे समय के लाभ इस पर निर्भर करेंगे कि बैंक्स इस कट को ग्राहकों तक कितनी प्रभावी ढंग से पहुंचाते हैं और वैश्विक आर्थिक स्थिति कैसे विकसित होती है। RBI का "अकॉमोडेटिव" स्टांस यह संकेत देता है कि भविष्य में और रेट कट की संभावना है, लेकिन यह मुद्रास्फीति और रुपये की स्थिरता पर भी नजर रखेगा। इस रेपो रेट कट के साथ, बाजार में और अधिक पैसा आएगा, जो NBFCs, छोटे व्यवसायों और रियल एस्टेट सेक्टर के लिए फायदेमंद होगा। GDP ग्रोथ के लिए भी अनुमान में बदलाव किया गया है। RBI ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए GDP ग्रोथ अनुमान को 6.7% से घटाकर 6.5% कर दिया है, जो यह संकेत देता है कि वैश्विक चुनौतियां भारत की आर्थिक गति को प्रभावित कर सकती हैं।

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