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UGC का विरोध, सामान्य वर्ग (जनरल कैटेगरी) के बच्चों के भविष्य के लिए !

झूठा/फालतू आरोप लगाने पर कोई विशेष सजा नहीं ! ड्राफ्ट में false/frivolous complaint पर penalty का क्लॉज था, लेकिन फाइनल नियम (जनवरी 2026) में हटा दिया गया—पीड़ित बिना डर के शिकायत करें, इसलिए safeguard नहीं रखा। झूठी शिकायत पर IPC 182/211 (झूठी रिपोर्ट/मानहानि) या कॉलेज के आंतरिक नियम लागू हो सकते हैं, लेकिन UGC में कोई penalty नहीं। अगर SC/ST/OBC छात्र जनरल छात्र को जातिगत भेदभाव करता है UGC नियम में कोई सीधा प्रावधान नहीं। ये एक तरफा  है, जनरल के लिए जाति पर कोई प्रोटेक्शन नहीं।   सामान्य वर्ग (जनरल कैटेगरी) के खिलाफ जातिगत भेदभाव (गाली, बहिष्कार, हारासमेंट) को UGC नियम में कवर नहीं किया गया।  जातिगत भेदभाव की परिभाषा (Regulation 3(c)): सिर्फ SC, ST, OBC के खिलाफ जाति/जनजाति आधारित भेदभाव को कवर करता है।  बच्चों के भविष्य के लिए  अगर जनरल कैटेगरी में बच्चे हैं, तो विरोध/जागरूकता/कानूनी रास्ता अपनाना उचित है—झूठे आरोप  से पढ़ाई/करियर प्रभावित हो सकता है। शांतिपूर्ण तरीके से आवाज उठाएं, ताकि नियम सभी के लिए बराबर और सुरक्षित बनें। ये कदम उठाकर सरकार वि...

बिहार चुनाव और जनता की उम्मीदें!


बिहार में बेरोजगारी और पलायन के मुद्दे इस चुनाव में रह सकते हैं प्रमुख़

बिहार में इस साल यानी 2025 में विधानसभा चुनाव होने है। यह चुनाव बिहार की राजनीति के लिए बेहद अहम माना जा रहा है, क्योंकि यह राज्य की अगली सरकार और नीतियों की दिशा तय करेगा। 

बिहार में बेरोजगारी और पलायन लंबे समय से बड़े मुद्दे रहे हैं। मतदाता इन पर ठोस कदमों की उम्मीद करते हैं। सरकारी स्कूलों और अस्पतालों की स्थिति भी चर्चा में रहेगी।  बिहार में जातिगत समीकरण हमेशा चुनाव को प्रभावित करते हैं। हाल ही में 65% आरक्षण का मुद्दा भी उठा है, जो रणनीति का हिस्सा बन सकता है। विपक्ष ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के स्वास्थ्य को मुद्दा बनाने की कोशिश की है, हालांकि एनडीए इसे खारिज करता है। नीतीश कुमार के नेतृत्व में एनडीए 225 से अधिक सीटें जीतने का लक्ष्य लेकर चल रहा है।

आरजेडी और कांग्रेस पिछले चुनाव की कमियों को दूर करने की कोशिश में हैं। कांग्रेस 70 या उससे ज्यादा सीटों पर लड़ने की तैयारी में है। अन्य: छोटे दल जैसे हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (HAM) और लोक जनशक्ति पार्टी (LJP) भी पिछली बार से अधिक सीटों की मांग अपने सहयोगियों से कर रहे हैं।

आमतौर पर बिहार में विधानसभा चुनाव अक्टूबर-नवंबर के महीनों में होते हैं। इस बार भी इसी समयसीमा में चुनाव होने की उम्मीद है। चुनाव आयोग अभी तक आधिकारिक तारीखों की घोषणा नहीं किया है, लेकिन यह घोषणा संभवतः जुलाई-अगस्त 2025 में हो सकती है।

अभी बिहार में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) की सरकार है, जिसमें जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) और भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) मुख्य सहयोगी हैं। नीतीश कुमार मुख्यमंत्री हैं। विपक्ष में महागठबंधन, जिसमें राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी), कांग्रेस और वाम दल शामिल हैं। तेजस्वी यादव आरजेडी के प्रमुख चेहरा हैं।

नए खिलाड़ी प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी भी इस बार सभी 243 सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी में है। उनका दावा है कि वे शिक्षा, रोजगार और पलायन जैसे मुद्दों पर फोकस करेंगे।

यह चुनाव नीतीश कुमार की राजनीतिक विरासत, तेजस्वी यादव की स्वीकार्यता और प्रशांत किशोर जैसे नए चेहरों की परीक्षा होगी। बिहार की 243 सीटों के लिए कांटे की टक्कर देखने को मिल सकती है, जिसमें जाति, विकास और गठबंधन की रणनीति निर्णायक होगी।

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