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UGC का विरोध, सामान्य वर्ग (जनरल कैटेगरी) के बच्चों के भविष्य के लिए !

झूठा/फालतू आरोप लगाने पर कोई विशेष सजा नहीं ! ड्राफ्ट में false/frivolous complaint पर penalty का क्लॉज था, लेकिन फाइनल नियम (जनवरी 2026) में हटा दिया गया—पीड़ित बिना डर के शिकायत करें, इसलिए safeguard नहीं रखा। झूठी शिकायत पर IPC 182/211 (झूठी रिपोर्ट/मानहानि) या कॉलेज के आंतरिक नियम लागू हो सकते हैं, लेकिन UGC में कोई penalty नहीं। अगर SC/ST/OBC छात्र जनरल छात्र को जातिगत भेदभाव करता है UGC नियम में कोई सीधा प्रावधान नहीं। ये एक तरफा  है, जनरल के लिए जाति पर कोई प्रोटेक्शन नहीं।   सामान्य वर्ग (जनरल कैटेगरी) के खिलाफ जातिगत भेदभाव (गाली, बहिष्कार, हारासमेंट) को UGC नियम में कवर नहीं किया गया।  जातिगत भेदभाव की परिभाषा (Regulation 3(c)): सिर्फ SC, ST, OBC के खिलाफ जाति/जनजाति आधारित भेदभाव को कवर करता है।  बच्चों के भविष्य के लिए  अगर जनरल कैटेगरी में बच्चे हैं, तो विरोध/जागरूकता/कानूनी रास्ता अपनाना उचित है—झूठे आरोप  से पढ़ाई/करियर प्रभावित हो सकता है। शांतिपूर्ण तरीके से आवाज उठाएं, ताकि नियम सभी के लिए बराबर और सुरक्षित बनें। ये कदम उठाकर सरकार वि...

हिंदी के महीनों की गणना व उससे जुड़ी रोचक बातें


सूर्य और चंद्रमा की गति को मिलाकर पंचांग के अनुसार हिंदी महीनों की गणना की जाती है

हिंदी महीनों की गणना पंचाग के आधार पर की जाती है, जो मुख्य रूप से चंद्र-सौर प्रणाली पर निर्भर करता है। यह प्रणाली सूर्य और चंद्रमा की गति को मिलाकर समय का हिसाब रखती है। हिंदी पंचांग में दो प्रमुख संवत् प्रचलित हैं विक्रम संवत और शक संवत, जिनके आधार पर महीनों की गणना होती है। हिंदी कैलेंडर में महीने चंद्रमा की कलाओं पर आधारित होते हैं। एक चंद्र मास अमावस्या से अगली अमावस्या तक या पूर्णिमा से अगली पूर्णिमा तक गिना जाता है। यह लगभग 29.5 दिनों का होता है।
सूर्य की गति के आधार पर संवत् वर्ष की गणना होती है। इसे संक्रांति यानी सूर्य का राशि परिवर्तन के आधार पर समायोजित किया जाता है। चंद्रमा और सूर्य के बीच कोणीय अंतर के आधार पर तिथियाँ गिनी जाती हैं। एक तिथि लगभग 12 डिग्री के अंतर पर बदलती है।
शुक्ल पक्ष में चंद्रमा के बढ़ने का समय यानी एकम से पूर्णिमा तक जबकि कृष्ण पक्ष में चंद्रमा के घटने का समय पूर्णिमा के अगले दिन से अमावस्या तक माना जाता है।
चैत्र मार्च-अप्रैल, वैशाख अप्रैल-मई, ज्येष्ठ मई-जून, आषाढ़ जून-जुलाई, श्रावण जुलाई-अगस्त, भाद्रपद अगस्त-सितंबर, आश्विन सितंबर-अक्टूबर, कार्तिक अक्टूबर-नवंबर, मार्गशीर्ष नवंबर-दिसंबर, पौष दिसंबर-जनवरी, माघ जनवरी-फरवरी,
फाल्गुन फरवरी-मार्च। ये महीने अंग्रेजी तारीखों से पूरी तरह मेल नहीं खाते, क्योंकि चंद्र मास छोटा होता है। इसलिए हर 2-3 साल में एक अधिक मास यानी अतिरिक्त महीना जोड़ा जाता है ताकि चंद्र और सौर वर्ष संतुलित रहें।
जब चंद्र मास और सौर मास के बीच अंतर बढ़ जाता है, तो एक अतिरिक्त महीना जोड़ा जाता है, जिसे अधिक मास कहते हैं। यह आमतौर पर किसी महीने का दोहराव होता है, जैसे अधिक आषाढ़। यह प्रक्रिया सूर्य संक्रांति के आधार पर तय होती है। 27 नक्षत्रों के आधार पर भी समय का हिसाब रखा जाता है। 
हिंदी महीनों की गणना एक जटिल लेकिन व्यवस्थित प्रणाली है, जो चंद्रमा और सूर्य की गति को संतुलित करती है। इसे समझने के लिए स्थानीय पंचांग देखना सबसे आसान तरीका है, क्योंकि यह तिथि, पक्ष और संक्रांति को स्पष्ट करता है। 

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