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UGC का विरोध, सामान्य वर्ग (जनरल कैटेगरी) के बच्चों के भविष्य के लिए !

झूठा/फालतू आरोप लगाने पर कोई विशेष सजा नहीं ! ड्राफ्ट में false/frivolous complaint पर penalty का क्लॉज था, लेकिन फाइनल नियम (जनवरी 2026) में हटा दिया गया—पीड़ित बिना डर के शिकायत करें, इसलिए safeguard नहीं रखा। झूठी शिकायत पर IPC 182/211 (झूठी रिपोर्ट/मानहानि) या कॉलेज के आंतरिक नियम लागू हो सकते हैं, लेकिन UGC में कोई penalty नहीं। अगर SC/ST/OBC छात्र जनरल छात्र को जातिगत भेदभाव करता है UGC नियम में कोई सीधा प्रावधान नहीं। ये एक तरफा  है, जनरल के लिए जाति पर कोई प्रोटेक्शन नहीं।   सामान्य वर्ग (जनरल कैटेगरी) के खिलाफ जातिगत भेदभाव (गाली, बहिष्कार, हारासमेंट) को UGC नियम में कवर नहीं किया गया।  जातिगत भेदभाव की परिभाषा (Regulation 3(c)): सिर्फ SC, ST, OBC के खिलाफ जाति/जनजाति आधारित भेदभाव को कवर करता है।  बच्चों के भविष्य के लिए  अगर जनरल कैटेगरी में बच्चे हैं, तो विरोध/जागरूकता/कानूनी रास्ता अपनाना उचित है—झूठे आरोप  से पढ़ाई/करियर प्रभावित हो सकता है। शांतिपूर्ण तरीके से आवाज उठाएं, ताकि नियम सभी के लिए बराबर और सुरक्षित बनें। ये कदम उठाकर सरकार वि...

जब नारद मुनि को भी हुआ विवाह करने का मन!

जब नारद मुनि को अपनी तपस्या और कामदेव पर विजय प्राप्त करने का हुआ अहंकार 

वे गर्व के साथ भगवान विष्णु के पास गए और अपनी उपलब्धि का बखान करने लगे। भगवान विष्णु ने उनके अहंकार को भांप लिया और इसे दूर करने के लिए एक लीला रची। नारद मुनि जब वैकुंठ से लौट रहे थे, तो रास्ते में उन्हें एक सुंदर नगर दिखाई दिया, जिसे भगवान विष्णु ने अपनी माया से रचा था। इस नगर का राजा शिलनिधि था, जिसकी एक अत्यंत सुंदर पुत्री थी। जिस राजकुमारी का नाम विश्वमोहिनी था। शिलनिधि ने अपनी पुत्री का स्वयंवर आयोजित किया था और नारद मुनि को आमंत्रित किया। राजा ने नारद से अपनी पुत्री की हथेली की रेखाएं देखकर उसके भविष्य के बारे में बताने को कहा। नारद मुनि ने जब राजकुमारी को देखा, तो वे उसके रूप पर मोहित हो गए। उसकी हथेली की रेखाओं से पता चला कि उसका पति विश्व-विजेता होगा और सभी उसके चरणों में नतमस्तक होंगे।
यह देखकर नारद के मन में विवाह की इच्छा जागी, और वे वैराग्य भूल गए।उन्होंने राजा से यह बात छिपाई और भगवान विष्णु के पास जाकर उनसे प्रार्थना की कि उन्हें ऐसा रूप दें कि राजकुमारी उन्हें चुन ले।भगवान विष्णु ने कहा, "मैं वही करूंगा जो तुम्हारे हित में होगा।" लेकिन अपनी माया से उन्होंने नारद का चेहरा वानर जैसा बना दिया। नारद को यह भ्रम हुआ कि वे बहुत सुंदर हो गए हैं। वे स्वयंवर में गए, पर राजकुमारी ने उन्हें नजरअंदाज कर किसी अन्य राजकुमार को वरमाला पहना दी। जब नारद ने जल में अपना प्रतिबिंब देखा, तो उन्हें सच्चाई पता चली। क्रोधित होकर उन्होंने भगवान विष्णु को शाप दे दिया कि जैसे उन्हें नारी का वियोग सहना पड़ा, वैसे ही विष्णु को भी पत्नी से वियोग सहना पड़ेगा।
बाद में विष्णु की माया समाप्त हुई, और नारद को अपनी भूल का एहसास हुआ। उन्होंने क्षमा मांगी। कहा जाता है कि इस शाप के कारण ही भगवान राम (विष्णु के अवतार) को सीता से वियोग सहना पड़ा।
अहंकार, कितना भी बड़ा तपस्वी क्यों न हो, उसे भटका सकता है। भगवान विष्णु ने अपनी लीला से नारद को यह सिखाया कि सच्ची भक्ति में अहंकार का स्थान नहीं होता। शिलनिधि राजा इस कथा में एक माध्यम मात्र थे, जिसके जरिए यह घटना घटी।

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